प्रयागराज। हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ०प्र०, प्रयागराज एवं हरे राम सेवा संस्थान, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में 14 मार्च 2026, शनिवार को गांधी सभागार, हिन्दुस्तानी एकेडेमी परिसर में ‘ठिठोली के रंग और काव्य के संग’ शीर्षक से भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार, देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।


कार्यक्रम का प्रारम्भ एकेडेमी परिसर में स्थापित पं० बालकृष्ण भट्ट, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन तथा सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण से हुआ। इसके उपरांत सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कवि सम्मेलन का विधिवत शुभारम्भ किया गया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कवीन्द्र प्रताप सिंह, अध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद काशी प्रांत तथा विशिष्ट अतिथि इंजी० हर्षवर्धन वाजपेयी, विधायक शहर उत्तरी प्रयागराज रहे। अतिथियों का स्वागत एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न एवं शॉल भेंट कर किया।


स्वागत वक्तव्य में पायल सिंह ने कहा कि “कविताएँ समाज को आईना दिखाती हैं। यह आयोजन भी समाज में व्याप्त कुरीतियों और विसंगतियों पर प्रहार करने का माध्यम बनेगा।”
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि हरेन्द्र प्रताप सिंह (नई दिल्ली) ने की तथा संचालन डॉ० अनन्त सिंह ने किया।
मुख्य अतिथि कवीन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि “मेरा कविता से सीधा संबंध भले न रहा हो, पर कविताएँ समाज को उसके सरोकारों से रूबरू कराती हैं और दिशा प्रदान करती हैं।”
विशिष्ट अतिथि इंजी० हर्षवर्धन वाजपेयी ने अपने संबोधन में कहा कि “हिन्दुस्तानी एकेडेमी से मेरा बहुत पुराना नाता है। मेरे परदादा की पुस्तक का प्रकाशन इसी एकेडेमी से हुआ था और उसके विमोचन कार्यक्रम में मैं बचपन में उनके साथ आया था।”
कवि सम्मेलन में आमंत्रित रचनाकारों का सम्मान भी पायल सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम में शैलेन्द्र मधुर (प्रयागराज), नरकंकरल (रायबरेली), डॉ० सुनील विक्रम सिंह (प्रयागराज), अमित मिश्रा (प्रयागराज), शुभम मिश्रा (दिल्ली), डंडा बनारसी (वाराणसी), नज़र इलाहाबादी (प्रयागराज), राधेश्याम भारती (प्रयागराज), शाम्भवी सिंह (मुम्बई), डॉ० जी. गणेशन मिश्र ‘समीर’ (प्रयागराज) तथा शिवम भगवती (प्रयागराज) ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कवियों ने अपनी कविताओं में देशभक्ति, प्रेम, सामाजिक विसंगतियों, समकालीन राजनीति तथा जीवन के विविध रंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। हास्य और व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, वहीं संवेदनशील रचनाओं ने उन्हें भावुक भी कर दिया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत कुछ पंक्तियाँ श्रोताओं के बीच विशेष रूप से सराही गईं—
“हे मातृभूमि तुझको नमन है,
तेरी वाणी, तेरी ध्वजा,
तेरा मान अमर रहे,
हम सबकी अटल प्रतिज्ञा से
वंदे मातरम् अमर रहे, वंदे मातरम् अजर रहे।”
— शुभम मिश्रा (दिल्ली)
“मैं कलमकार हूँ, पत्रकारिता कर रहा हूँ,
बेईमानी के काले तवे पर
ईमानदारी की सफेद रोटियाँ सेंक रहा हूँ।”
वरिष्ठ कवि हरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपनी चर्चित व्यंग्य रचना ‘आज की पत्रकारिता’ का पाठ करते हुए कहा—
“क्यों नज़र आते हैं सब हमको न जाने एक से,
ग़म की दुनिया एक सी, सारे फ़साने एक से।
कुछ सवाल ऐसे भी हैं इस ज़िंदगी के दरमियाँ,
जिनसे भी पूछा है हमने, बस बहाने एक से।”
कार्यक्रम में अन्य कवियों की रचनाओं को भी श्रोताओं ने भरपूर सराहा और देर तक तालियों की गूंज सभागार में सुनाई देती रही।
अंत में एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने सभी अतिथियों, कवियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों में राम नरेश तिवारी ‘पिवण्डीवासा’, गोपाल जी पाण्डेय, संजय कुमार सिंह, वीरेन्द्र तिवारी, सुनील दानिश, जीतेन्द्र मिश्र ‘जलज’, श्याम प्रकाश पाण्डेय, शुभम पाण्डेय सहित शोधार्थी एवं शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
Anveshi India Bureau



