बरेली में तीसरी बेटी पैदा होने पर माता-पिता ने उसे निसंतान दंपती को सौंप दिया। फिर जिला अस्पताल पहुंचकर मासूम के अपहरण का शोर मचा दिया। पुलिस की जांच में पूरा मामला खुल गया।
बरेली के जिला अस्पताल में दंपती ने जिस बच्ची के अपहरण का शोर मचाया, वह रात में ही सकुशल तलाश कर ली गई। उसके माता पिता ही इस मामले में कठघरे में खड़े दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि दंपती तीसरी बेटी पैदा होने से घबरा गए थे और जिला अस्पताल जाए बिना ही उन्होंने वहां से बच्ची के अगवा होने की झूठी कहानी बना दी थी। पुलिस दंपती के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट में रिपोर्ट देगी, उनकी काउंसिलिंग भी कराएगी।
यह था मामला
इज्जतनगर के परतापुर चौधरी गांव निवासी मकसूद ने शुक्रवार रात 11 बजे उन्हें तहरीर देकर बताया था कि वह पत्नी शबाना और 21 दिन की बच्ची को लेकर दिन में शहर आए थे। पत्नी को दवा दिलानी थी और बच्ची का जन्म प्रमाणपत्र बनवाना था। पत्नी को दवा लेने के लिए उन्होंने जिला अस्पताल में छोड़ दिया और वह जिला अस्पताल में ही सीएमओ दफ्तर की ओर जन्म प्रमाणपत्र लेने चले गए थे।
मकसूद के मुताबिक, जब वह वापस लौटा तो पत्नी उस जगह नहीं मिली जहां उसे छोड़ा था। काफी तलाश करने के बाद शाम साढ़े पांच बजे पत्नी जिला अस्पताल में पेड़ों के पास बेहोश मिली। उनकी बच्ची लापता थी। मकसूद ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी को नशा देकर किसी गिरोह ने उनकी 21 दिन की बच्ची का अपहरण कर लिया है। शिकायत पर पुलिस ने गहनता से जांच पड़ताल की तो मामला कुछ और ही निकला।
सीसीटीवी फुटेज से खुला राज
इज्जतनगर के परतापुर चौधरी निवासी मकसूद की शिकायत पर शुक्रवार रात में ही कोतवाल सुरेश चंद्र गौतम ने जिला अस्पताल चौकी प्रभारी सुदीप बघेल से अस्पताल परिसर के सीसीटीवी कैमरे चेक कराए। इसमें कुछ खास जानकारी नहीं मिली। दंपती ने जिला अस्पताल में बच्ची की दवा लेने और जन्म प्रमाणपत्र कक्ष में जाने की बात बताई, लेकिन फुटेज से पुष्ट हुआ कि मकसूद व उसकी पत्नी सवाना पूरे दिन या रात भर जिला अस्पताल आए ही नहीं थे।
निसंतान दंपती को दे दी थी बच्ची
पुलिस ने सख्ती की तो दोनों ने कबूल कर लिया कि उन्होंने अपनी बच्ची बहेड़ी के शेखूपुर निवासी शबावी को दे दी थी। जिला अस्पताल में ही करीब दो साल पहले शबावी और शबाना की मुलाकात और फिर दोस्ती हुई थी। शबावी के पति तस्लीम वर्ष 2018 से अपाहिज हैं। दोनों के कोई बच्चा नहीं है और शबावी ने बच्चा गोद लेने की इच्छा जताई थी। वहीं शबाना को इस बार बेटा होने की उम्मीद थी। उसे 21 दिन पहले तीसरी बेटी हुई तो तंगहाली में बढ़ते परिवार को सीमित करने का मन बना लिया।
मकसूद ने बताया कि वह पत्नी शबाना के साथ शुक्रवार सुबह बेटी की दवा व उसका जन्म प्रमाणपत्र लेने की बात कहकर घर से निकला था और बहेड़ी जाकर शबावी को बच्ची सौंप दी। वहां से लौटकर रात को घर गए तो परिवार व कुनबे के अन्य लोगों ने बच्ची न देखकर सवाल पूछने शुरू कर दिए। तब इन लोगों ने जिला अस्पताल से बच्ची के अगवा होने का बहाना बना दिया।
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