लखनऊ, 16 फरवरी 2026।
ग्रामीण युवाओं के भविष्य की दिशा तय करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) द्वारा होटल सेंट्रम, लखनऊ में दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला-सह-प्री-ईसी (Pre-EC) बैठक का आयोजन किया गया। ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में उत्तर प्रदेश सहित लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, बिहार और झारखंड के वरिष्ठ अधिकारी एवं कौशल विशेषज्ञ शामिल हुए।

कार्यशाला का उद्घाटन प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता डॉ. हरिओम ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उन्होंने कहा कि कौशल विकास अब पारंपरिक प्लेसमेंट आधारित मॉडल से आगे बढ़कर उद्यमिता-आधारित मॉडल की ओर अग्रसर है। भारत सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY 2.0) में स्वरोजगार घटक जोड़ने के UPSDM प्रस्ताव को मंजूरी दी है। साथ ही ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना’ के तहत MSME ऋण सीमा को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किए जाने का निर्णय युवाओं को आर्थिक संबल देगा।
डॉ. हरिओम ने न्यूनतम 12,000 रुपये वेतन और 75 प्रतिशत इन-स्टेट प्लेसमेंट नीति की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं की दीर्घकालिक हैंडहोल्डिंग सुनिश्चित की जाएगी।
मिशन अधिकारियों ने बताया कि कौशल विकास का बजट 150 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। भविष्य की रणनीति में ‘ग्रीन जॉब्स’ और ‘हेल्थकेयर’ को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही माइग्रेशन फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना, उद्योगों से सीधा समन्वय और डेटा आधारित ‘स्किल गैप असेसमेंट’ के आधार पर जिला स्तरीय योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
बैठक में RSETI 2.0 के तहत वार्षिक कार्य योजना (AAP) 2026 पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि RSETI ने 631 केंद्रों के माध्यम से अब तक 43 लाख से अधिक युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा है। आगामी सुधारों में SC/ST, महिलाओं और बीपीएल परिवारों को प्राथमिकता देते हुए समावेशी विकास पर जोर दिया जाएगा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद लद्दाख द्वारा DDU-GKY के 70–80 प्रतिशत लक्ष्यों की पूर्ति को उल्लेखनीय उपलब्धि बताया गया।
कार्यशाला के प्रथम दिवस के समापन पर सातों राज्यों ने ग्रामीण भारत में सशक्त एवं स्थायी ‘स्किल इकोसिस्टम’ विकसित करने का सामूहिक संकल्प लिया।
Anveshi India Bureau



