उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में तैनात सुष्मिता जॉन देश की पहली ऐसी महिला लोको पायलट हैं, जिन्होंने बनारस-आगरा और बनारस-खजुराहो वंदे भारत के इनॉग्रल रन (उद्घाटन सफर) पर ट्रेन की कमान संभाली।
उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में तैनात सुष्मिता जॉन देश की पहली ऐसी महिला लोको पायलट हैं, जिन्होंने बनारस-आगरा और बनारस-खजुराहो वंदे भारत के इनॉग्रल रन (उद्घाटन सफर) पर ट्रेन की कमान संभाली। बलिया में जन्मी सुष्मिता ने वर्ष 2019 में सहायक लोको पायलट (एएलपी) के रूप में रेलवे में सेवा शुरू की थी।
अगस्त 2024 में उन्हें पहली बार वंदे भारत चलाने का गौरव मिला। उन्होंने अपना पहला सफर प्रयागराज से बनारस के बीच पूरा किया और तब से वह लगातार वंदे भारत चला रही हैं। हाल ही में रेलमंत्री ने सुष्मिता को अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया है।
सुष्मिता की ससुराल बनारस में है। इसी वजह से सहकर्मी उन्हें ‘काशी की बहू’ कहकर पुकारते हैं। सुष्मिता कहती हैं कि वंदे भारत चलाना गौरवशाली अनुभव है। खजुराहो वंदे भारत उद्घाटन के दिन पीएम मोदी ने मेरे सामने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई, तो वह पल मेरे जीवन का सबसे यादगार पल था। परिवार के सहयोग के बिना यह सफर मुमकिन नहीं था।
प्रयागराज मंडल की निधि शुक्ला उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) की पहली महिला लोको पायलट हैं, जो दो वर्षों से वंदे भारत ट्रेन चला रही हैं। कुंडा, प्रतापगढ़ निवासी निधि की नियुक्ति रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) के माध्यम से वर्ष 2017 में सहायक लोको पायलट के रूप में हुई थी।
वर्ष 2019 में पहली बार यात्री ट्रेन के रूप में मेमू का संचालन किया। मई 2024 में निधि ने पहली बार वंदे भारत के पहियों को गति दी। उन्होंने प्रयागराज से बनारस तक सेमी हाईस्पीड ट्रेन चलाई। तब से अब तक वह लगातार आगरा-बनारस एवं वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत ही चला रही हैं।
उन्होंने राजधानी एक्सप्रेस और कई अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों का भी सफल संचालन किया है। निधि कहती हैं मेरा लक्ष्य सिर्फ सुरक्षित सफर और समय की पाबंदी होती है। वहीं, प्रयागराज मंडल में महिला विंग बढ़ रही है। मंडल में 29 महिला लोको पायलट हैं। इसमें से निधि शुक्ला, सुष्मिता, ममता यादव एवं शैफाली श्रीवास्तव ही वंदे भारत चला रही हैं।
महिला रेलकर्मियों को शाइन का सुरक्षा कवच, अब ऑनलाइन दर्ज होंगी शिकायतें
रेलवे बोर्ड के निर्देश पर महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सेक्सुअल हैरेसमेंट इंसिडेंट नोटिफिकेशन फॉर इंपावरमेंट (शाइन) मॉड्यूल आठ मार्च को लॉन्च हाेगा। इसके माध्यम से महिला कर्मी कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न की शिकायतें सीधे एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगी। बोर्ड के पत्र के अनुसार, इस नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य शिकायतों को पूरी तरह गोपनीय रखना और उन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। इस मॉडयूल के तहत यदि पीड़ित स्वयं शिकायत दर्ज करने की स्थिति में नहीं है, तो नामित अधिकृत अधिकारी उसकी ओर से मामला दर्ज कर सकेंगे।
रेलवे परिसर में आने वाली बाहरी महिला आगंतुक और संविदाकर्मी भी जरूरत पड़ने पर इस सिस्टम का लाभ उठा सकेंगी। एनसीआर के प्रयागराज, आगरा और झांसी मंडलों में इस मॉड्यूल को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि शाइन मॉड्यूल के माध्यम से महिला कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण मिलेगा। यह सिस्टम शिकायतों के त्वरित निस्तारण में मील का पत्थर साबित होगा।
Courtsyamarujala.com



