सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल गोराना तथा बाइस अन्य बंधुआ मजदूरों द्वारा दाखिल याचिका में माननीय न्यायमूर्ति श्री प्रकाश पाड़िया के एकल पीठ से राज्य सरकार, बागपत जिलाधिकारी और मानवाधिकार आयोग को तथा भट्ठा मालिकों को नोटिस जारी किया तथा पांच सप्ताह बाद याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया । याचीगण को ओर से अधिवक्ता चार्ली प्रकाश प्रस्तुत हुए ।
याचिकाकर्ता के अनुसार ग्राम शेर पुर लुहारी जिला बागपत में 23 मजदूरों को पत्नी बच्चों सहित बिना कोई मजदूरी दिए बंधुआ बना कर रखा गया था, हाड़ तोड़ मेहनत कराई जाती थी पर खाना भी पर्याप्त नहीं मिलता था। महीनों बाद किसी प्रकार जिलाधिकारी तक यह सूचना पहुंची तो निर्मल गोराना के हस्तक्षेप से वे अब मुक्त कराए गए पर न तो बंधुआ कानून के तहत उन्हें काम की वेतन दिया गया और न ही रिलीज सर्टिफिकेट मिला जिससे उनका पुनर्वास हो सके
उन्हें काफी मारा पीटा भी गया और सामान भी छीन लिया गया।



