Wednesday, March 4, 2026
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कपसाड़ हत्या और अपहरण: छावनी बना गांव…ढाई किमी पहले बैरिकेडिंग; सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने; पूरी कहानी

मेरठ के सरधना के कपसाड़ गांव से अपहृत युवती का दूसरे दिन शुक्रवार को भी सुराग नहीं लग सका। वहीं नामजद आरोपियों को भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी। दिनभर युवती की मां सुनीता का शव लेकर परिवार घर में ही बैठा रहा। सपा, बसपा, भीम आर्मी, असपा नेता-कार्यकर्ता और स्थानीय लोग हंगामा करते रहे। पुलिस ने गांव और आसपास का इलाका भी छावनी में तब्दील कर दिया।

करीब 19 घंटे की जद्दोजहद के बाद पूर्व विधायक संगीत सोम, एसपी देहात अभिजीत कुमार, एडीएम सिटी की मौजूदगी में पुलिस ने लिखित वादा किया कि 48 घंटे के भीतर रुबी को तलाश कर लिया जाएगा। परिवार के एक सदस्य को स्थानीय चीनी मिल में स्थायी रोजगार दिया जाएगा।

Meerut Murder and kidnapping in Kapsad village turns into a fortress barricades erected 2.5 km away

 

गांव कपसाड़ में परिजनों से वार्ता करने पहुंचे पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
10 लाख रुपये का चेक दिया गया। परिवार के एक सदस्य को शस्त्र लाइसेंस दिलाने का भरोसा दिया। सुरक्षा के लिए गांव में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। इसके बाद रात करीब पौने 8:00 बजे सुनीता का अंतिम संस्कार हो सका। बेटे नरसी ने मुखाग्नि दी।
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इससे पहले बृहस्पतिवार रात 12 बजे जब सुनीता का शव गांव पहुंचा तो परिजनों ने दो टूक कह दिया था कि जब तक बेटी मिल नहीं जाएगी वे सुनीता का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। वहीं सपा विधायक अतुल प्रधान को गांव के बाहर रोकने को लेकर हंगामा हुआ। पीड़ित परिवार ने विधायक को गांव के अंदर प्रवेश कराया। 
Meerut Murder and kidnapping in Kapsad village turns into a fortress barricades erected 2.5 km away
छावनी बना गांव, सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

सरधना के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की हत्या के बाद उनकी बेटी रूबी के अपहरण ने सूबे की सियासत को गरम कर दिया है। शुक्रवार को एक तरफ अपहृत बेटी के लिए बिलखता परिवार था तो दूसरी तरफ गांव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लगी रही।

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20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा समेत 500 00 से अधिक पुलिसकर्मी

सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के जमावड़े को देखते हुए सुबह से ही गांव के चारों ओर पुलिस की तैनाती से गांव छावनी में तब्दील हो गया था। गांव की सीमा से ढाई किमी पहले ही बैरिकेडिंग कर दी गई थी। एसएसपी, एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक, चार सीओ, 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा समेत 500 से अधिक पुलिसकर्मी गांव में तैनात रहे। आरआरएफ की टीम भी मुस्तैद दिखाई दी।

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सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने गांव की सीमा पर रोका
सुबह 7:30 बजे से ही कपसाड़ गांव के बॉर्डर पर तनाव चरम पर पहुंच गया। पुलिस ने गांव की घेराबंदी कर दी थी। परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक सुनीता का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया था। सपा विधायक अतुल प्रधान, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष चरण सिंह और अन्य कार्यकर्ताओं के अलावा कांग्रेस नेता गांव जाने के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें सीमा पर ही रोक लिया।
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सपा विधायक ने कही ये बात
इस पर विधायक समेत सभी लोग गांव के बाहर ही सड़क पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान काफी गहमागहमी की स्थिति रही। एक बार तो लगा कि पुलिस लाठीचार्ज न कर दे हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। सपा विधायक ने कहा कि अनुसूचित जाति की महिला की हत्या और बेटी का अपहरण हुआ है। यदि दूसरे समुदाय का यह मामला होता तो अब तक बुलडोजर की कार्रवाई हो चुकी होती।
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‘हम पीड़ित परिवार के हक के लिए लड़ेंगे लड़ाई’
सरकार विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है और हर बार पुलिस को आगे कर देती है। विधायक ने कहा कि परिवार को जब तक न्याय नहीं मिल जाता, वह उनके हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे।

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पीड़ित परिवार मौके पर पहुंचकर विधायक के साथ धरने पर बैठा
करीब डेढ़ घंटे तक चली नारेबाजी और नोकझोंक के बाद मृतका सुनीता के पति सतेंद्र और बेटे भी वहां पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। माहौल इतना बिगड़ा कि पुलिस को रास्ता देना पड़ा। इसके बाद सभी लोग मृतक सुनीता के घर पहुंचे।

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भाई ने पूछा- मेरी बहन आएगी या नहीं
धरने के दौरान सबसे भावुक कर देने वाला पल तब आया जब सुनीता का बड़ा बेटा नरसी रोते हुए विधायक अतुल प्रधान से लिपट गया। उसने सिसकते हुए पूछा- विधायक जी, बस इतना बता दो मेरी बहन अब वापस आएगी या नहीं। इस सवाल ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।

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ये थीं प्रमुख मांगें
बेटी रूबी को अपहर्ताओं के चंगुल से मुक्त कराकर सुरक्षित वापस लाया जाए।
मुख्य आरोपी पारस सोम और उसके साथियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाया जाए। परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
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पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च
गांव के बिगड़ते हालात को देखते हुए डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार और एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने खुद मोर्चा संभाला। भारी पुलिस बल के साथ गांव की गलियों में फ्लैग मार्च निकाला गया। जिलाधिकारी और एसएसपी दोपहर 12 बजे के आसपास गांव में पहुंच गए थे। दोनों अधिकारी दो घंटे तक गांव में मौजूद रहे और पीड़ित परिवार से बात की। वहीं प्रशासन के अधिकारियों ने पांच बार परिजनों के साथ बंद कमरे में वार्ता की।
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यह था मामला
बृहस्पतिवार सुबह सुनीता अपनी बेटी रुबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। गांव के ही पारस सोम, सुनील और उनके साथियों ने सुनीता पर फरसे से वार कर दिया और बेटी रूबी का अपहरण कर फरार हो गए थे। उपचार के दौरान मोदीपुरम के अस्पताल में सुनीता ने दम तोड़ दिया था।
Courtsyamarujala.com
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