प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता शंभू चोपड़ा ने हाल ही में अपने विधिक जीवन के 50 वर्ष पूर्ण किए। उन्होंने 1 फरवरी 1976 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कर न्याय, नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा से परिपूर्ण अपने लंबे और निष्कलंक पेशेवर जीवन की शुरुआत की थी।
इस अवसर पर प्रयागराज की सिविल सोसाइटी द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में उन्हें उनके दीर्घ, प्रेरणादायी एवं आदर्श विधिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति अरुण टंडन एवं पूर्व न्यायमूर्ति राजीव जोशी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने शंभू चोपड़ा को कर्मठ, ईमानदार तथा सिद्धांतों से कभी समझौता न करने वाला अधिवक्ता बताया। वहीं न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने उन्हें कर्तव्यनिष्ठ, संवेदनशील और समाज के प्रति सजग व्यक्तित्व का धनी कहा। कार्यक्रम में उपस्थित प्रोफेसर संजय सक्सेना ने अधिवक्ता शंभू चोपड़ा की इस सोच की सराहना की कि उन्होंने वकालत को केवल पेशा नहीं, बल्कि एक पवित्र कर्म माना, जो वर्तमान समय में दुर्लभ है।
सम्मान समारोह में अनेक वरिष्ठ अधिवक्ता, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन गुंजन मिश्रा वर्मा ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सरस्वती पत्रिका के संपादक अनुपम परिहार ने शंभू चोपड़ा को पहले एक श्रेष्ठ मानव और उसके बाद एक उत्कृष्ट अधिवक्ता बताया। अपने प्रत्युत्तर भाषण में शंभू चोपड़ा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस सम्मान को अपने जीवन का अत्यंत भावुक एवं अविस्मरणीय क्षण बताया।
समारोह ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों के प्रति समाज की आस्था और सम्मान का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।
Anveshi India Bureau



