Friday, February 13, 2026
spot_img
HomePrayagrajBBAU एवं IIP के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सतत जल शुद्धिकरण की नई...

BBAU एवं IIP के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सतत जल शुद्धिकरण की नई तकनीक को भारत सरकार से मिला पेटेंट 

लखनऊ। स्वच्छ और सुरक्षित जल की वैश्विक चुनौती के समाधान की दिशा में आविष्कारक डॉ. निधि अस्थाना, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (BBAU) तथा प्रो. अंशुमान श्रीवास्तव, भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP), लखनऊ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (BBAU) की महिला वैज्ञानिक (DST) डॉ. निधि अस्थाना, भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP), लखनऊ के वैज्ञानिक/प्रोफेसर प्रो. तनवीर आलम एवं प्रो. अंशुमान श्रीवास्तव, साथ ही प्रो. देवेश कुमार और डॉ. कौशिक पाल ने संयुक्त रूप से ओक सिल्क फाइब्रोइन-संविष्ट पॉलिमर नैनोकॉम्पोज़िट झिल्लियाँ विकसित की हैं। यह नवाचार प्राकृतिक जैव-सामग्री और आधुनिक नैनो प्रौद्योगिकी का एक अनूठा संगम है, जो पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ जल शुद्धिकरण समाधान प्रस्तुत करता है।इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP) के निदेशक श्री आर. के. मिश्रा ने सभी शोधकर्ताओं को हार्दिक बधाई दी तथा भविष्य में इसी प्रकार के और अधिक नवाचारी एवं समाजोपयोगी अनुसंधान करने के लिए उन्हें प्रेरित किया।

इसतकनीककामुख्यआधारओकसिल्कफाइब्रोइनहै, जोओकवृक्षोंसेप्राप्तएकजैव-आधारितप्रोटीनहै।अपनीप्राकृतिकमजबूती, लचीलापनऔरजैव-अनुकूलताकेलिएप्रसिद्धइसप्रोटीनकोपॉलिमरमैट्रिक्समेंसम्मिलितकरउच्च-प्रदर्शननिस्पंदनझिल्लियाँतैयारकीगईहैं।येझिल्लियाँपारंपरिकजलशुद्धिकरणझिल्लियोंकीतुलनामेंअधिकप्रभावी, टिकाऊऔरपर्यावरणकेअनुकूलहैं।

शोधकर्ताओंकेअनुसार, विकसितझिल्लियाँउत्कृष्टयांत्रिकमजबूती, बेहतरलचीलापनऔरउच्चरासायनिकस्थिरताप्रदर्शितकरतीहैं।साथही, इनमेंअधिकजलपारगम्यताऔरचयनात्मकआयनअपवर्जनकीक्षमताहै, जिससेपानीसेभारीधातुओं, कार्बनिकएवंअकार्बनिकप्रदूषकों, बैक्टीरियाऔरअन्यहानिकारकअशुद्धियोंकोप्रभावीढंगसेहटायाजासकताहै।

इसशोधसेजुड़ेवैज्ञानिक/प्रोफेसरनेबतायाकियहनवाचारपूरीतरहसततविकासकीअवधारणापरआधारितहै। “जैव-अपघटनीयऔरप्राकृतिकस्रोतोंसेप्राप्तसामग्रीकाउपयोगकरहमनेएकऐसीतकनीकविकसितकीहै, जोपर्यावरणपरन्यूनतमप्रभावडालतेहुएअधिकतमशुद्धिकरणक्षमताप्रदानकरतीहै।यहपारंपरिक, गैर-अपघटनीयजलनिस्पंदनसामग्रियोंकाएकसशक्तविकल्पबनसकतीहै,” उन्होंनेकहा।

इसतकनीककीएकऔरबड़ीविशेषताइसकीलागत-प्रभावशीलताऔरबड़ेपैमानेपरउत्पादनकीक्षमताहै।इसेनगरनिगमोंकेजलशुद्धिकरणसंयंत्रों, ग्रामीणपेयजलयोजनाओं, औद्योगिकअपशिष्टजलउपचारतथाआपातकालीनजलशुद्धिकरणप्रणालियोंमेंआसानीसेअपनायाजासकताहै।खासतौरपरविकासशीलक्षेत्रोंकेलिएयहतकनीकअत्यंतउपयोगीसिद्धहोसकतीहै।

IIP लखनऊऔरBBAU केंद्रीयविश्वविद्यालयकेबीचयहसहयोगइसबातकाउदाहरणहैकिअंतर-विषयकअनुसंधानकिसप्रकारसमाजकीजटिलसमस्याओंकासमाधानप्रस्तुतकरसकताहै।सामग्रीविज्ञान, पॉलिमरइंजीनियरिंगऔरपर्यावरणप्रौद्योगिकीकेसमन्वयसेविकसितयहनवाचारभारतकेस्वच्छजलमिशनऔरसंयुक्तराष्ट्रकेसततविकासलक्ष्य–6 (स्वच्छजलऔरस्वच्छता)कोसशक्तसमर्थनप्रदानकरसकताहै।

जलसंकटऔरप्रदूषणकीबढ़तीसमस्याकेबीचलखनऊसेनिकलायहशोधयहसंदेशदेताहैकिप्रकृतिसेप्रेरितविज्ञानहीभविष्यमेंस्वच्छ, सुरक्षितऔरसततजलसंसाधनोंकीकुंजीबनसकताहै।

 

Anveshi India Bureau

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments