इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रीसस मकाक (लाल बंदर) के बढ़ते उत्पात को रोकने के लिए राज्य सरकार से कार्ययोजना मांगी है। कहा है कि अगली सुनवाई पर छह अप्रैल तक गाजियाबाद और मथुरा में की गई कार्रवाई का शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट दें।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रीसस मकाक (लाल बंदर) के बढ़ते उत्पात को रोकने के लिए राज्य सरकार से कार्ययोजना मांगी है। कहा है कि अगली सुनवाई पर छह अप्रैल तक गाजियाबाद और मथुरा में की गई कार्रवाई का शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट दें। साथ ही इनके उत्पात को नियंत्रित करने के लिए जिलों में अपनाए गए उपायों की भी जानकारी दें।
यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी, न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की खंडपीठ ने विनीत शर्मा व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि प्रदेश में रीसस मकाक की वास्तविक संख्या, उनके हॉटस्पॉट क्षेत्रों और मानव-बंदर संघर्ष की प्रकृति को समझने के लिए व्यवस्थित फील्ड सर्वे आवश्यक है।
समग्र कार्ययोजना तैयार करने में कम से कम एक साल का वक्त लगेगा। तब तक बंदरों की पकड़, परिवहन और पुनर्वास से संबंधित वर्तमान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत ही कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एक हाई पावर कमेटी भी गठित की जा चुकी है। कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित अध्ययन से पहले यह स्पष्ट किया जाए कि मौजूदा एसओपी के तहत जिला स्तरीय समितियों ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।
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