The Kerala Story 2 Movie Review: चर्चित फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म देखने से पहले पढ़िये ये रिव्यू और जानिए कैसी है ये फिल्म…
महीनों की बहस, सेंसर बोर्ड की खींचतान और कोर्टरूम ड्रामे के बाद आखिरकार विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2 गोज बियोंड’ रिलीज तो हो गई। लेकिन मजेदार बात ये है कि फिल्म से ज्यादा ड्रामा इसके बाहर हुआ। थिएटर में पर्दा उठते ही साफ लग जाता है कि ये फिल्म किसी गहरी कहानी या थ्रिलर बनने की कोशिश नहीं कर रही। ये बस अपनी बात (या कहें एजेंडा) दोहराती नजर आती है।

दिव्या (अदिति भाटिया) 16 साल की डांसर, जिसे शोहरत के नाम पर फंसाया जाता है। नेहा (ऐश्वर्या ओझा) एथलीट, जिसे प्यार का भ्रम देकर धोखा मिलता है। सुरेखा (उल्का गुप्ता) UPSC की तैयारी कर रही लड़की, जो एक पत्रकार के नाम पर शुरू हुए रिश्ते में गहराई से फंस जाती है।
इसके बाद फिल्म में शुरू होती है जबरदस्ती, हिंसा, डर, धमकी और बार-बार वही घटनाएं। कई सीन असरदार तो हैं, लेकिन कहानी कहीं आगे नहीं बढ़ती। ऐसा लगता है जैसे ऑडियंस इमोशनल रोलर-कोस्टर पर नहीं, बल्कि एक लंबी, थका देने वाली फिल्म देख रहे हैं।
सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि किरदारों को भागने या कुछ बदलने के मौके दिखते हैं, लेकिन वे बस फैसले न लेकर आगे बढ़ते रहते हैं। वही फैसले, जो कहानी को फिल्म की अपनी थीसिस के हिसाब से चलाते हैं।

सपोर्टिंग कास्ट की बात करें तो खासकर माता–पिता की भूमिका निभाने वाले कलाकार पुरवा पराग, रामजी बाली, राजीव कुमार, श्वेता मुंशी, अभिषेक शंकर और लक्ष्मी सभी ने बेहद सच्ची और प्रभावशाली परफॉरमेंस दी है। खासकर केरल के माता–पिता वाला क्लाइमैक्स सीन बहुत ही स्वाभाविक और दिल को छू लेने वाला लगता है।
हां, कुछ स्थानों पर फिल्मजरुरत से ज्यादा ड्रामेटिक और एकतरफा लगती है। हालांकि, इसका भावनात्मक असर और विषय की गंभीरता इसे पूरी तरह अनदेखा करना मुश्किल बनाते हैं।

इसके अलावा कई किरदार ठीक से विकसित नहीं किए गए, जिससे उनके फैसले अवास्तविक लगते हैं और कहानी में गहराई नहीं आती।
संवेदनशील विषय होने के बावजूद फिल्म कई जगह प्रचार जैसी महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे अलग-अलग नजरियों को दिखाने की बजाय कहानी को बस एक ही दिशा में धकेला गया है। जिसकी वजह से फिल्म का असर कमजोर पड़ जाता है।

कई जगह कहानी दोहराव भरी लगती है और संवेदनशील विषय को भी काफी ड्रामेटिक तरीके से दिखाया गया है। इसलिए कुल मिलाकर, यह फिल्म हर किसी के लिए नहीं है – आप इसे देखें या नहीं, यह पूरी तरह आपकी पसंद और इस विषय में रुचि पर निर्भर करता है।



