अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में हिन्दुस्तानी एकेडेमी, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के गांधी सभागार में दो सत्रों में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं महिला कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ एकेडेमी परिसर में स्थापित पं. बालकृष्ण भट्ट, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन एवं सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारम्भ किया गया।

प्रथम सत्र में एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने आमंत्रित अतिथियों का पुष्पगुच्छ, स्मृति-चिह्न और शॉल देकर स्वागत किया। इस अवसर पर पर्यावरणविद् मंशा सिंह को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

अतिथियों का स्वागत करते हुए पायल सिंह ने कहा कि “एक सशक्त समाज तभी बन सकता है जब स्त्री और पुरुष दोनों को समान अधिकार और सम्मान मिले। हमें महिलाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए कि वे अपने सपनों को पूरा करें और समाज में अपना योगदान दें।”
द्वितीय सत्र में महिला कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें आमंत्रित कवयित्रियों का स्वागत व सम्मान भी पायल सिंह द्वारा किया गया। सम्मेलन में डाॅ. नीलिमा मिश्रा (प्रयागराज), पारुल सिंह राठौर (प्रयागराज), रचना सक्सेना (प्रयागराज), मंजू पाण्डेय ‘महक जौनपुरी’ (प्रयागराज), डाॅ. चारुशीला सिंह (गोरखपुर) तथा शिखा श्रीवास्तव (लखनऊ) ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली काव्य-पाठ किया।
कवयित्रियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और समकालीन विसंगतियों पर सार्थक प्रहार किया। उनकी रचनाओं ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
इस अवसर पर प्रस्तुत कुछ प्रमुख पंक्तियाँ—
रचना सक्सेना, प्रयागराज
“तुम्हें दर्द अब तो सुनाना पड़ेगा,
भुला रंज को मुस्कुराना पड़ेगा।
ये दुनिया तो जैसी है वैसी रहेगी,
तो खुद को बदलना सिखाना पड़ेगा।”
पारुल सिंह राठौर, प्रयागराज
“सीधा सवाल मेरा सीधा जवाब दो,
कितने फसाद बोए इसका हिसाब दो।
यह कहां लिखा है निष्छल को मारना,
मैं भी नजर से देखूं अपनी किताब दो।”
डाॅ. चारुशीला सिंह, गोरखपुर
“चपल हूँ धीर हूँ मैं तो आधार हूँ,
शक्ति हूँ तेज हूँ मैं ही लाचार हूँ।
विधि का नवनीत हूँ सार संसार हूँ,
शिव जटाओं में सिमटी प्रबल धार हूँ।”
डाॅ. नीलिमा मिश्रा
“रूढ़ियों की पार कर प्राचीर नारी,
तोड़ दे तू पैर की जंजीर नारी।
लक्ष्मीबाई तुम्हारी प्रेरणा हो,
लक्ष्मी का रूप बन हे वीर नारी।”
महक जौनपुरी, प्रयागराज
“गुल बदन गुल बहार कहते हैं,
मुझको फूलों का हार कहते हैं।
प्यास कहते हैं मुझे वो सागर की,
मुझको शीतल बयार कहते हैं।”
अध्यक्षीय काव्य-पाठ से पूर्व कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध उद्घोषक संजय पुरुषार्थी को मंच पर आमंत्रित किया। उन्होंने अपने लोकप्रिय अंदाज में “जय हिंद” के उद्घोष के साथ श्रोताओं को संबोधित करते हुए महिलाओं और बेटियों पर कई प्रभावशाली मुक्तक सुनाए तथा मंच पर आमंत्रण के लिए पायल सिंह का आभार व्यक्त किया।
कवयित्री सम्मेलन का संचालन डाॅ. आकांक्षा पाल ने किया तथा अध्यक्षता डाॅ. नीलिमा मिश्रा ने की। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन एकेडेमी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने किया।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों में डाॅ. उदय प्रताप सिंह (पूर्व अध्यक्ष, हिन्दुस्तानी एकेडेमी), डाॅ. दिलीप सरदेसाई, डाॅ. अजीत कुमार सिंह (सचिव), डाॅ. शर्वेश पाण्डेय, डाॅ. शुभम सिंह, डाॅ. उषा मिश्रा, डाॅ. वीरेन्द्र कुमार तिवारी, रघुनाथ द्विवेदी, डाॅ. संजय सिंह, विवेक सत्यांशु, अमित शर्मा, रविनंदन सिंह, डाॅ. रश्मि शुक्ला सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
Anveshi India Bureau



