संस्था सरोकार के संयोजन में वरिष्ठ कथाकार, उपन्यासकार, पूर्व डीजीपी एवं महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति विभूति नारायण राय के 75वें जन्मवर्ष के अवसर पर सप्रू हॉल, अंजुमन रूह-ए-अदब, इलाहाबाद में एक गरिमामय गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का प्रारंभ अध्यक्षता कर रहे अली अहमद फातमी द्वारा अंगवस्त्रम एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान से हुआ। अनिता गोपेश ने राय साहब की पत्नी श्रीमती पद्मा राय का पुष्पगुच्छ देकर अभिनंदन किया।





इस अवसर पर वक्ताओं ने राय साहब के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। आनंद मालवीय ने उनके साथ अपने लंबे सान्निध्य को याद करते हुए कहा कि राय साहब ने उन्हें वैचारिक रूप से गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने एक रोचक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि नास्तिक विचारधारा के बावजूद कुंभ मेले में मेला अधिकारी रहते हुए उन्हें गंगा पूजा करवानी पड़ी, जिस पर उनकी माताजी की भावनात्मक प्रतिक्रिया उल्लेखनीय रही।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुमार वीरेंद्र ने राय साहब की सादगी और सहजता की सराहना करते हुए कहा कि उच्च पद पर रहते हुए भी वे अत्यंत सरल जीवन शैली अपनाते थे और गोष्ठियों में सभी के साथ दरी पर बैठकर भाग लेते थे। उन्होंने जोकहरा स्थित उनके द्वारा स्थापित पुस्तकालय को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल बताया।
वरिष्ठ पत्रकार सुनील शुक्ला ने बताया कि एसपी रहते हुए राय साहब ने विश्वविद्यालय छात्रावासों को खाली होने से बचाया तथा पत्रकारों की सदैव सहायता की। वरिष्ठ कवि एवं कलाकार अजामिल जी ने कठिन समय में मिले उनके सहयोग को याद किया।




रचनाकर्म पत्रिका के संपादक अशोक मिश्रा ने उनके लेखन को अद्वितीय बताते हुए कहा कि उन्होंने दलितों एवं महिलाओं के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया। वहीं वर्धा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सुप्रिया पाठक ने उनके कुलपति कार्यकाल को विश्वविद्यालय के विकास और हरियाली के लिए महत्वपूर्ण बताया।
अनिता गोपेश ने उन्हें “खांटी इलाहाबादी व्यक्तित्व” बताया, जबकि प्रगतिशील लेखक संघ, इलाहाबाद के कार्यकारी अध्यक्ष सुरंग राहि ने उनकी निर्भीकता की सराहना की।
मुख्य वक्ता रामजी राय ने उन्हें कुशल योजनाकार बताते हुए पाँच दशकों के अपने संबंधों को साझा किया और उनकी रचनाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. अली अहमद फातमी ने कहा कि राय साहब कम बोलने वाले, किंतु अत्यंत बुद्धिमान और साहसी व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्होंने उनकी तुलना महान शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ से करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर अडिग रहना उनकी विशेषता है।
इस अवसर पर डॉ. सरफ़राज़ आलम, प्रियदर्शन मालवीय, डॉ. गया सिंह, कमल किशोर सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम से पूर्व विभूति नारायण राय पर केंद्रित रचनाक्रम पत्रिका के विशेषांक का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रकर्ष मालवीय ने किया। इस अवसर पर दुर्गा सिंह, सुनील दानिश, सुशांत चट्टोपाध्याय, सुनील कुमार, डॉ. मिथिलेश, अविनाश मिश्र, के.के. पांडे, कृष्णा शंकर मिश्र, गोविंद निषाद, रूपम मिश्र, प्रदीप्त प्रीत, अमरजीत राम सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।



