प्रयागराज शहर जल निकासी और बाढ़ की पुरानी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए अब ‘नदी-केंद्रित’ शहरी नियोजन मॉडल की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय ‘वॉटर ऐज़ लीवरेज’ कार्यशाला का समापन सफलतापूर्वक हुआ।
इस कार्यशाला में नीदरलैंड्स के अंतरराष्ट्रीय जल विशेषज्ञों और राष्ट्रीय स्तर के हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य शहर की जल संबंधी चुनौतियों को सतत विकास के अवसरों में बदलना और ‘शहरी नदी प्रबंधन योजना’ (URMP) को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाना था।
कार्यशाला के दौरान शहर की आंतरिक नदियों और जलमार्गों की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। कालिंदीपुरम नाले को ‘हरित एवं स्वच्छ गलियारे’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। डच विशेषज्ञों ने ‘प्रकृति आधारित समाधान’ अपनाने के साथ गंदे पानी और वर्षा जल के लिए अलग-अलग प्रवाह वाली ‘दोहरी प्रणाली’ लागू करने का सुझाव दिया, जिससे जल निकासी व्यवस्था अधिक प्रभावी और स्वच्छ बन सकेगी।
आगामी कुंभ मेला 2031 को ध्यान में रखते हुए यमुना तट के विकास के लिए एक व्यापक रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया। इसमें ‘पारिस्थितिक पार्क’ और ‘प्रदर्शनी घाट’ के निर्माण का प्रस्ताव शामिल है, जो जैव विविधता के संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।
ससुर खदेरी नदी के पुनरुद्धार को भी प्राथमिकता में रखा गया। वर्तमान में अतिक्रमण, अवैध निर्माण और कचरे के कारण यह नदी संकरे और प्रदूषित नाले में बदल गई है, जिससे मानसून में जलभराव की समस्या बढ़ जाती है। विशेषज्ञों ने अतिक्रमण हटाने, नदी की धारा को पुनर्जीवित करने और इसे शहर की मुख्य जल निकासी प्रणाली से जोड़ने के सुझाव दिए।
इस पहल के तहत डच कार्यक्रम तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा और दो प्रमुख परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में मदद करेगा। साथ ही, शहरी ढांचे, गाद प्रबंधन और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी स्थानीय चुनौतियों की भी पहचान की गई है।
समापन सत्र में मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि शहर की प्रमुख समस्याओं की पहचान हो चुकी है और अब उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में नीदरलैंड्स का अनुभव प्रयागराज के लिए मार्गदर्शक साबित होगा। नगर आयुक्त साई तेजा ने नदियों के पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने को शहर के भविष्य के लिए आवश्यक बताया।
विश्व जल दिवस से पूर्व आयोजित इस कार्यक्रम में “जल और महिला नेतृत्व” विषय पर भी चर्चा हुई, जिसमें निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया।
यह कार्यशाला राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, संयुक्त राष्ट्र पर्यावास एवं नीदरलैंड सरकार के सहयोग से आयोजित की गई। इस अवसर पर नीदरलैंड्स के जल आयुक्त सैंडर कारपाई, एनएमसीजी के उप महानिदेशक नलिन श्रीवास्तव सहित कई विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित रहे।
Anveshi India Bureau



