शहर की पहचान और इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना कहे जाने वाले 160 साल पुराने ओल्ड यमुना ब्रिज (लोहे का पुल) के संरक्षण को लेकर रेलवे ने कवायद शुरू की है। शुक्रवार को रेलवे की टीम ने पुल के किनारे वाले हिस्से, जिसे शोर स्पैन कहा जाता है उसे बदलने का काम किया।
शहर की पहचान और इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना कहे जाने वाले 160 साल पुराने ओल्ड यमुना ब्रिज (लोहे का पुल) के संरक्षण को लेकर रेलवे ने कवायद शुरू की है। शुक्रवार को रेलवे की टीम ने पुल के किनारे वाले हिस्से, जिसे शोर स्पैन कहा जाता है उसे बदलने का काम किया। इस मरम्मत कार्य के चलते नैनी से शहर की ओर आने वाले मार्ग पर चार घंटे तक वाहनों के पहिये थमे रहे।
दरअसल, नैनी की तरफ पुल का पहला हिस्सा (शोर स्पैन) जो जमीन के ठीक ऊपर स्थित है, इसके नीचे खुला स्थान न होने के कारण यहां लगातार गंदगी जमा हो रही थी। इससे लोहे की संरचना में जंग लग रही थी और यह जर्जर होने लगी थी। हादसे की आशंका को देखते हुए रेलवे ने इस हिस्से को बदलने का निर्णय लिया।
इसके लिए शुक्रवार दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक रेलवे ने ब्लॉक लेकर काम शुरू किया। इस दौरान नैनी से प्रयागराज शहर की ओर आने वाले सभी वाहनों को नए यमुना पुल की ओर डायवर्ट कर दिया गया। बाइक सवारों और छोटे वाहनों को लेप्रोसी मिशन और नैनी छोर से ही वापस मोड़ दिया गया।
ब्लॉक की जानकारी न होने के कारण बड़ी संख्या में राहगीर पुल के मुहाने तक पहुंच गए, जिन्हें पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल ने समझा-बुझाकर वापस भेजा। उत्तर मध्य रेलवे के सीनियर पीआरओ डॉ. अमित कुमार मालवीय का कहना है कि पुल के सड़क मार्ग वाले हिस्से में मरम्मत कार्य के लिए ब्लॉक लिया गया था। इस दौरान ट्रेनों का संचालन पूरी तरह सामान्य रहा।
29 मार्च तक चलेगा कार्य
रेलवे प्रशासन के अनुसार, मरम्मत का यह कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। 27 से 29 मार्च तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत शनिवार को भी दिन में ब्लॉक लिया जाएगा। इस दौरान एक और स्पैन बदलने का काम होना है, लिहाजा नैनी से शहर आने वाले लोग जाम से बचने के लिए नए यमुना पुल का ही प्रयोग करें।
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