Thursday, March 19, 2026
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HomePrayagrajउप्र के मज़दूरों को कब मिलेगा उनके आवासों का मालिकाना अधिकार:—विनय मिश्रा

उप्र के मज़दूरों को कब मिलेगा उनके आवासों का मालिकाना अधिकार:—विनय मिश्रा

उत्तर प्रदेश के नैनी, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर समेत कई जिलों की औद्योगिक श्रमिक बस्तियों में रहने वाले लगभग डेढ़ करोड़ मज़दूरों को उनके आवासों का मालिकाना अधिकार दिए जाने के लिए श्रमिक बस्ती समिति नैनी प्रयागराज द्वारा पिछले 1 वर्ष से आंदोलन चलाया जा रहा है।

श्रमिक बस्ती समिति के महासचिव विनय मिश्र ने कहा है कि उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के अधिकारी पिछले 43 वर्षों से यह नहीं बता रहे हैं कि श्रमिक कॉलोनियों के आवासों में रहने वाले लोगों को उनके कमरों का मालिकाना अधिकार कब मिलेगा?

समिति के महासचिव विनय मिश्र ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सन 1978 में जारी की गई राजाज्ञा के अनुसार 43 वर्ष पहले जिन आवासों का मालिकाना अधिकार उसमें रहने वाले लोगों को मिल जाना चाहिए था। वह समस्या पिछले 43 वर्षों से लंबित है।

घोर आश्चर्य की बात तो यह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश की अवहेलना की जा रही है और उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के अधिकारी मुख्यमंत्री के आदेश के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के आदेश पर भी श्रम विभाग के अधिकारियों ने अमल नहीं किया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रम विभाग को उप्र की श्रमिक बस्तियों के निवासियों को मालिकाना हक दिए जाने के लिए कार्य योजना तैयार कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। उत्तर प्रदेश श्रम विभाग को यह कार्य योजना तैयार करनी थी। पांच साल बीत गए। लेकिन कार्ययोजना का कहीं कोई अता-पता नहीं है।

केंद्र सरकार के आदेशानुसार अन्य राज्यों की तरह उप्र की श्रमिक बस्तियों में रहने वाले लोगों को उनके आवासों का मालिकाना अधिकार नहीं दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश मालिकाना अधिकार आंदोलन के संयोजक, श्रमिक बस्ती समिति के महासचिव विनय मिश्र ने कहा है कि शासन के निर्देशानुसार दिनांक 29 नवंबर 2017 में श्रमिक बस्तियों के निवासियों को मालिकाना हक दिलाए जाने के संबंध में कार्य योजना तैयार कर उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया गया था।

शासन के निर्देशानुसार सभी हितधारकों से विचार विमर्श करके उनका मंतव्य,सहमति प्राप्त करते हुए प्रस्ताव विस्तृत कार्य योजना तैयार कर उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित था।

इस कार्य योजना को तैयार करने हेतु प्रदेश के सभी श्रमिक बस्तियों में गठित समितियों का मंतव्य और विचार प्राप्त किए जाने के संबंध में गत 3 जनवरी 2018 को कानपुर में श्रम आयुक्त, कानपुर की अध्यक्षता में एक बैठक भी हुई थी।
काफी समय बीत जाने के बावजूद बैठक के अलावा इस दिशा में कुछ भी नहीं हुआ। समिति के महासचिव विनय मिश्र ने कहा है कि पिछले 43 वर्षों से इस समस्या को श्रम विभाग के अधिकारी जान बूझ कर लटकाए हुए हैं। इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। मुख्यमंत्री के आदेश के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

श्री मिश्र ने कहा है कि मालिकाना हक दिए जाने की मांग को लेकर आठ सितंबर 2024 रविवार को श्रमिक बस्ती, नैनी, मानस पार्क में स्थानीय निवासियों की बैठक होगी। जिसमें आंदोलन की अग्रिम कार्रवाई पर विचार विमर्श होगा।
महासचिव विनय मिश्र ने कहा है कि मालिकाना अधिकार दिए जाने के लिए शासन ने प्रदेश स्थित औद्योगिक श्रमिक बस्तियों को बेचने का निर्णय लिया था।

सन 1995 में बिक्री प्रक्रिया शुरू भी की गई। लेकिन श्रम विभाग के अधिकारियों ने साजिश रची, बिक्री प्रक्रिया को रुकवा दिया। जिसकी वजह से प्रदेश के लाखों लोग आज भी मालिकाना हक से वंचित है।

श्री मिश्र ने कहा है कि प्रदेश सरकार एक तरफ तो गरीबों को आवास बना कर दे रही है। वहीं दूसरी ओर भारत सरकार द्वारा पिछले 70 वर्षों से बने बनाए आवासो में रहने वाले लोग सरकार के बिक्री आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके आवासों का मालिकाना अधिकार दिया जाए। मालिकाना अधिकार के लिए नैनी में आंदोलन चल रहा है। जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा श्रमिक बस्ती के निवासियों का आंदोलन चलता रहेगा।

 

 

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