प्रयागराज। हिन्दुस्तानी एकेडेमी में गुरुवार को हुए कार्यक्रम को लेकर देश के मशहूर गीतकार यश मालवीय ने जो मुद्दा उठाया है, वह बिल्कुल ही सही है। गुरुवार को हुए हिन्दुस्तानी के इस कार्यक्रम से पहले भी जो आयोजन हुआ था, उसमें भी प्रयागराज के उसी कवि को ही आमंत्रित किया गया था। बार-बार कुछ ख़ास लोगों को इस तरह से आमंत्रित किया जाता है, जैसे ये संस्थाएं उनकी व्यक्तिगत जागीर हैं। बाकी नगर के अन्य कवियों की उपेक्षा काफी समय से की जा रही है।
गुफ़्तगू के अध्यक्ष डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने मीडिया को जारी किए गए अपने बयान में कहा है कि प्रयागराज के एक-दो तथाकथित कवि हैं, जो हिन्दुस्तानी एकेडेमी, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संग्रहालय, आकाशवाणी और दूरदर्शन आदि समेत कई ऐसे ही केंद्रों का चक्कर लगाते रहते हैं। इन सस्थाओं में जब कोई नया अधिकारी आता है तो उसकी सेवा में फूल-माला लेकर चम्मचगिरी करने पहुंच जाते हैं। उनसे कवि सम्मेलन की ठेकेदारी खुद को सौंपने का आग्रह करते हैं। इसके साथ ही यहां के अधिकारियों को यह भी जताते हैं कि देश-प्रदेश के आला अफसर और मंत्रियों आदि से उनका अच्छा संपर्क है, इन अधिकारियों से मिलवाकर उनका काम भी करवा देेगे। इस झासे में आकर यहां के अधिकारी इन्हें कवि सम्मेलन की ठेकेदारी सौंप देते हैं। जबकि उच्च स्तर पर किसी विशेष कवि को ही बार-बार आमंत्रित करने का कोई आदेश नहीं है। सरकार द्वारा निष्पक्ष रूप से कार्यक्रम कराए जाने का स्पष्ट आदेश है।
हिन्दुस्तानी एकेडेमी तो नगर की सबसे प्रमुख साहित्यिक धरोहर है। हिन्दी और उर्दू साहित्य की प्रगति के लिए इसका गठन किया गया था। मगर, पिछले लगभग 12-15 वर्षो से यहां से कवि सम्मेलनों की ठेकेदारी शुरू हो गई है। नगर के बाहर से आने वाले अधिकारियों को इस बारे में कोई ख़ास जानकारी नहीं होती, जिसकी वजह से ये बहकावे में आ जा रहे हैं। इसकी जानकारी प्रदेश के मुख्यमंत्री, भाषा विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को देने की आवश्यकता है, ताकि इन संस्थाओं का सही ढंग से संचालन हो।
Anveshi India Bureau



