घोड़े, रथ और बग्घियों पर सवार होकर ढोल नगाड़े और शंख की विजय ध्वनि के साथ संतों ने छावनी प्रवेश यात्रा निकाली। संतों के अद्भुत रूप और वैभव को देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर शहरियों की भारी भीड़ जमा रही।
संगम की मखमली रेती पर नागाओं और संतों का प्रवेश जारी है। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े की पेशवाई के बाद रविवार को श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़े के संतों ने राजशाही अंदाज में नगर प्रवेश किया। घोड़े, ऊंट, रथ और बग्घियों पर सवार होकर ढोल नगाड़े और शंख की विजय ध्वनि के साथ संतों ने छावनी प्रवेश यात्रा निकाली। संतों के अद्भुत रूप और वैभव को देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर शहरियों की भारी भीड़ जमा रही।
रास्ते में साधु-संत भाला, त्रिशूल और तलवार के साथ करतब दिखाते हुए चल रहे थे। डीजे और बाजा की धुन पर संतों ने जमकर नृत्य किया। शरीर पर भस्म भूभूति के साथ चंदन और विभूति तिलक लगाकर साधु संतों का जत्था हर-हर महादेव के गगनभेदी नारों के साथ आगे बढ़ रहा था। तमाम जटाजूट संत छावनी यात्रा में आकर्षण का केंद्र रहे।
छावनी प्रवेश यात्रा के चलते एक घंटे से अधिक समय तक यातायात परिवर्तित रहा। इसके चलते रीवा मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बाइक और कार से लेकर बड़े वाहनों तक जाम में खड़े रहे। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती रही। यात्रा के मद्देनजर होने वाले यातायात रूट परिवर्तन के संबंध में प्रशासन की ओर से शनिवार को ही एडवाइजरी जारी कर दी गई थी। साथ वैकल्पिक मार्गों के बारे में लोगों को जानकारी दे दी थी।
छावनी प्रवेश के दौरान अखाड़े के साधु-संत अपने नवनिर्मित अखाड़ा भवन मड़ौका आश्रम से निकलकर मड़ौका मार्ग होकर पुराना रीवा मार्ग से डांडी तिराहा पहुंचे। उसके बाद यहां से बाएं मुड़कर नया रीवा मार्ग से होकर लेप्रोसी चौराहा, नया यमुना पुल, रेलवे क्रॉसिंग से दाहिने मुड़कर त्रिवेणी मार्ग पर मिलने वाले अप्रोच मार्ग से होते हुए फोर्ट रोड चौराहा, त्रिवेणी मार्ग, त्रिवेणी उत्तरी पांटून पुल पारकर शिविर में पहुंचे।



