Sunday, April 26, 2026
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Mahakumbh : आवाहन अखाड़े के संतों ने राजशाही अंदाज में किया छावनी प्रवेश, घोड़े-बग्घी पर सवार होकर निकले साधु

घोड़े, रथ और बग्घियों पर सवार होकर ढोल नगाड़े और शंख की विजय ध्वनि के साथ संतों ने छावनी प्रवेश यात्रा निकाली। संतों के अद्भुत रूप और वैभव को देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर शहरियों की भारी भीड़ जमा रही।

संगम की मखमली रेती पर नागाओं और संतों का प्रवेश जारी है। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े की पेशवाई के बाद रविवार को श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़े के संतों ने राजशाही अंदाज में नगर प्रवेश किया। घोड़े, ऊंट, रथ और बग्घियों पर सवार होकर ढोल नगाड़े और शंख की विजय ध्वनि के साथ संतों ने छावनी प्रवेश यात्रा निकाली। संतों के अद्भुत रूप और वैभव को देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर शहरियों की भारी भीड़ जमा रही।

रास्ते में साधु-संत भाला, त्रिशूल और तलवार के साथ करतब दिखाते हुए चल रहे थे। डीजे और बाजा की धुन पर संतों ने जमकर नृत्य किया। शरीर पर भस्म भूभूति के साथ चंदन और विभूति तिलक लगाकर साधु संतों का जत्था हर-हर महादेव के गगनभेदी नारों के साथ आगे बढ़ रहा था। तमाम जटाजूट संत छावनी यात्रा में आकर्षण का केंद्र रहे।

छावनी प्रवेश यात्रा के चलते एक घंटे से अधिक समय तक यातायात परिवर्तित रहा। इसके चलते रीवा मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बाइक और कार से लेकर बड़े वाहनों तक जाम में खड़े रहे। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती रही। यात्रा के मद्देनजर होने वाले यातायात रूट परिवर्तन के संबंध में प्रशासन की ओर से शनिवार को ही एडवाइजरी जारी कर दी गई थी। साथ वैकल्पिक मार्गों के बारे में लोगों को जानकारी दे दी थी।

छावनी प्रवेश के दौरान अखाड़े के साधु-संत अपने नवनिर्मित अखाड़ा भवन मड़ौका आश्रम से निकलकर मड़ौका मार्ग होकर पुराना रीवा मार्ग से डांडी तिराहा पहुंचे। उसके बाद यहां से बाएं मुड़कर नया रीवा मार्ग से होकर लेप्रोसी चौराहा, नया यमुना पुल, रेलवे क्रॉसिंग से दाहिने मुड़कर त्रिवेणी मार्ग पर मिलने वाले अप्रोच मार्ग से होते हुए फोर्ट रोड चौराहा, त्रिवेणी मार्ग, त्रिवेणी उत्तरी पांटून पुल पारकर शिविर में पहुंचे।

पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा ने महाकुंभ नगर में किया छावनी प्रवेश

मड़ौका स्थित आश्रम पहले संतों ने भगवान गणेश को खिचड़ी का भोग लगया, इसके बाद संतों ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद छावनी प्रवेश की यात्रा प्रारंभ हुआ। करीब चौदह किलोमीटर की यात्रा में पांच हजार से अधिक लोग शामिल रहे। इसमें नागा, संत और सन्यासी के साथ उनके अनुयायी थे। आखाड़े के मंडलेश्वर ट्रैक्टर के बने सिंहासन पर सवार होकर यात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। वहीं नागा सन्यासी लाठी और तलवार बाजी का करतब दिखाते हुए आगे बढ़ रहे थे।

पूरे रास्ते संतों के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ जमा रही। यात्रा आश्रम से शुरू होकर टीसीआई चौराहा, फौव्वारा चौराहा, नए यमुना पुल पर पहुंची। इसके बाद नए यमुना पुल से होते हुए महाकुंभ नगर में प्रवेश किया। यहां से त्रिवेणी मार्ग स्थित पांटूल पुल से होते हुए यात्रा अखाड़ा के शिविर में पहुंची। यात्रा को लेकर प्रशासन द्वारा पुल के एक लेन को बंद कर दिया गया था, साथ ही यात्रा के आगे और पीछे पुलिस कर्मी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

छावनी प्रवेश यात्रा में श्री महंत सभापति पूनम गिरी, राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत सत्य गिरी, संरक्षक श्री महंत भारद्वाज गिरी, रमता पंच में श्री महंत भीम गिरी, बृजेश गिरी, मंगदा नंद सरस्वती, थानापति बिहारी गिरी, थानापति वरूणेश्वर गिरी, श्री महंत गणेश गिरी, श्री महंत भोला गिरी, श्री महंत अवधेशानंद गिरी सहित बड़ी संख्या में साधु सन्यासी और महंत शामिल रहे।

फिर उसी रूट से छावनी प्रवेश, राहगीरों की हुई फजीहत

अखाड़े के छावनी प्रवेश के दौरान भले ही ट्रैफिक डायवर्जन किया गया हो, लेकिन राहगीरों की काफी फजीहत हुई। 14 दिसंबर को ही जूना अखाड़े की पेशवाई के दौरान प्रयागराज-मिर्जापुर, प्रयागराज-रीवा व प्रयागराज-वारणसी हाईवे पर राहगीर छह घंटे तक भीषण जाम से जूझे थे। तब भी यह बात सामने आई थी कि अगर पेशवाई जुलूस का रूट यातायात के दबाव को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाता तो शायद स्थिति अलग होती, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पुराने जाम से सबक नहीं लेते हुए फिर उसी मार्ग से छावनी प्रवेश यात्रा निकालने की अनुमति दी गई। पीसीएस प्री की परीक्षा होने के कारण तमाम अभ्यर्थी जाम में फंसकर परेशान हुए।

Courtsy amarujala.com
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