उत्तर प्रदेश को 01 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में यह क्षेत्र मजबूत आधार के रूप में उभर रहा है।
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मार्गदर्शन में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। किसानों की उपज के प्रसंस्करण, भंडारण और मूल्य संवर्धन के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को जोड़कर महिला सशक्तीकरण को भी मजबूती दी जा रही है।
उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की संख्या के मामले में देश में अग्रणी है। आईटी सेक्टर के बाद यह प्रदेश का सर्वोच्च प्राथमिकता वाला सेक्टर है, जिसमें रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। ई-कॉमर्स, निर्यात के बढ़ते अवसरों और तकनीकी प्रगति के कारण इस क्षेत्र में तेज़ी से विस्तार हो रहा है।



इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में तथा विशेष सचिव टी.के. शीबू की उपस्थिति में खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय, लखनऊ में अप्रेजल समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुल 12 निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 10 प्रस्तावों को स्वीकृति देते हुए राज्य स्तरीय इम्पावर्ड कमेटी के समक्ष भेजने की संस्तुति की गई।
स्वीकृत प्रस्ताव सहारनपुर (2), सीतापुर, अंबेडकरनगर, शाहजहांपुर, लखनऊ, पीलीभीत, अलीगढ़, बरेली और मेरठ जनपदों से संबंधित हैं।
बैठक में पूर्व में स्वीकृत एवं पूर्णतः स्थापित इकाइयों औरा़ एग्रोटेक प्रा.लि., गोरखपुर तथा जुपीटर फूड प्रोडक्ट्स इंडिया प्रा.लि., एटा को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। निवेशकों से स्थानीय किसानों से कच्चा माल क्रय करने, स्वदेशी मशीनों के उपयोग, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के सोलराइजेशन पर विशेष ध्यान देने की अपील की गई।
Anveshi India Bureau



