उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की मंगलवार को बैठक में परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और समयबद्ध बनाने को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की मंगलवार को बैठक में परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और समयबद्ध बनाने को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। इसके अलावा आयोग के पास उपलब्ध सभी पत्रावलियों और अभिलेखों (रिकॉर्ड) का डिजिटलीकरण कराने का निर्णय लिया गया। इससे न केवल कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि दस्तावेज के सुरक्षित संरक्षण और त्वरित उपलब्धता में भी सुविधा होगी। आयोग ने परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए एजेंसियों के चयन को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से जल्द ही विज्ञप्ति जारी करने का फैसला किया है।
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि आयोग के सामान्य कार्यों के निष्पादन के लिए एजेंसी का चयन तय समय सीमा के भीतर किया जाएगा। इसके साथ ही आयोग की आवश्यकताओं के अनुरूप वर्तमान में विभिन्न एजेंसियों के साथ किए गए समझौतों (एमओयू) का परीक्षण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगे चलकर किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी या प्रक्रियागत विसंगति उत्पन्न न हो।
बैठक में यह भी तय किया गया कि आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली भर्तियों के विभिन्न चरणों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी। परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिए गए हैं कि वह आगामी बैठक में एसओपी का प्रारूप प्रस्तुत करें।
एसओपी के अंतिम रूप लेने के बाद ही शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की प्रस्तावित तिथियों 29 और 30 जनवरी को लेकर अंतिम निर्णय किया जाएगा। इसके अलावा आयोग ने संकेत दिए हैं कि एसओपी लागू होने के बाद ही प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) के करीब 30 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। माना जा रहा है कि इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, निष्पक्ष और विवाद मुक्त हो सकेगी।
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