कटरा स्थित द पाम्स रिसोर्ट – रॉयल गार्डन (लक्ष्मी टॉकीज के सामने) में “विजन 2047 : विकसित भारत – विकसित प्रदेश” की थीम पर आयोजित प्रयागराज पुस्तक मेले के चौथे दिन रविवार को पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी। अवकाश का दिन और कड़ाके की ठंड के बावजूद पाठकों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
आयोजक मनोज सिंह चंदेल और सह-संयोजक मनीष गर्ग ने संयुक्त रूप से बताया कि मेले में साहित्य, विज्ञान, धर्म-कर्म, बाल साहित्य, आत्मकथाएँ, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की पुस्तकें, इतिहास तथा विभिन्न भाषाओं और राज्यों की साहित्यिक कृतियाँ उपलब्ध हैं। इसके साथ ही पुस्तकों से जुड़ी विविध सामग्री भी प्रदर्शित की गई है, जो हर आयु वर्ग के पाठकों को आकर्षित कर रही है।
पुस्तक मेले के प्रवेश द्वार पर स्थित राजकमल प्रकाशन समूह के स्टॉल पर नामी-गिरामी लेखकों की कृतियाँ पाठकों का विशेष ध्यान खींच रही हैं। स्टॉल प्रतिनिधि प्रत्युष सिंह के अनुसार अशोक कुमार पाण्डेय की बीसवीं सदी के तानाशाह, श्रीलाल शुक्ल की राग दरबारी, डॉ. तुलसीराम की मुर्दहिया, रामधारी सिंह दिनकर की रश्मिरथी तथा कांता भारती की रेत की मछली की अच्छी मांग बनी हुई है। कई पुस्तकों पर विशेष छूट भी दी जा रही है।

वाणी प्रकाशन समूह के स्टॉल पर धर्मवीर भारती की कालजयी कृति गुनाहों का देवता आज भी पाठकों की पहली पसंद बनी हुई है। इसी स्टॉल पर भगवान राम के जीवन और आदर्शों पर आधारित दो उपन्यास विशेष चर्चा में रहे—भगवान सिंह की अपने-अपने राम और हाल ही में प्रकाशित रहीस सिंह की कैकेयी के राम।
कैकेयी के राम पारंपरिक रामकथा से अलग कैकेयी के दृष्टिकोण से कथा को प्रस्तुत करती है, जिसमें उनके प्रेम, अंतर्द्वंद्व और राम के मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में उनकी भूमिका को मानवीय संवेदनाओं के साथ उकेरा गया है। वहीं अपने-अपने राम पाठकों को आदि से अंत तक बांधे रखने वाली प्रभावशाली कृति के रूप में सराही जा रही है।
इसी स्टॉल पर लोकगायिका मालिनी अवस्थी की पुस्तक चंदन किवाड़ की भी उल्लेखनीय बिक्री देखी गई। स्टॉल प्रतिनिधि राकेश सिन्हा के अनुसार यहां पुस्तकों पर 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इसके अतिरिक्त ज्योतिराव गोविंदराव फुले की गुलामगिरी और बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन का चर्चित उपन्यास लज्जा भी पाठकों की मांग में शामिल हैं।
रविवार को मेले के सांस्कृतिक मंच पर पुस्तक कैप्टन राघवेंद्र प्रभा पर परिचर्चा आयोजित की गई। इस अवसर पर लेखक शिब्बू गाज़ीपुरी और पुस्तक की अंग्रेज़ी अनुवादक सृष्टि राज को उनके साहित्यिक योगदान के लिए शुभकामनाएँ दी गईं। वक्ताओं ने शिब्बू गाज़ीपुरी की संवेदनशील और ऐतिहासिक लेखनी तथा सृष्टि राज द्वारा किए गए सटीक, प्रभावशाली और भावपूर्ण अंग्रेज़ी अनुवाद की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में ईश्वर से कामना की गई कि लेखक और अनुवादक आगे भी साहित्य जगत को ऐसी ही उत्कृष्ट कृतियाँ प्रदान करते रहें।
Anvesha India bureau



